शहर का आयकर विभाग मार्च-अप्रैल यानी वित्तीय वर्ष शुरू होने से पहले सक्रिय हो चुका है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट सरकारी डिपार्टमेंट को टैक्स और टीडीएस जमा नहीं करने की याद दिलवाने लगा है। शिक्षा, वन विभाग और बिजली विभाग को 77 लाख रुपए जमा करने का नोटिस भेजा है। ये वे पैसे हैं जो किसी भी डिपार्टमेंट में भुगतान के प्रावधानों के हिसाब से लगते हैं, लेकिन उन विभागों के अधिकारियों ने जमा नहीं किए। ऐसा पिछले 11 साल से चल रहा है।इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को उन विभागों के पोर्टल में यह पैसा जमा होते दिख रहा है, लेकिन किस खाते में जा रहा हैं, इसकी जानकारी नहीं है। यही कारण है कि शिक्षा, वन विभाग और बिजली विभाग से आयकर विभाग ने पूछा है कि 11 वर्षों से कथित तौर पर जमा हो रहे यह पैसे कहां और किस खाते में जा रहे हैं? फिलहाल अधिकारियों की तरफ से इसका कोई जवाब नहीं भेजा गया है। 10 फरवरी को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने तीनों विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों से इसकी जानकारी मांगी है।उन्होंने लिखा है कि उनके आईटीडी सिस्टम पर डेटा और रिकॉर्ड के अवलोकन पर उन्हें तमाम वित्तीय वर्ष में इन पैसों की पेंडेंसी दिख रही है। यह भी दिख रहा है कि यह पैसा उनके विभाग के किसी अधिकृत अधिकारियों द्वारा जमा करवाया जा रहा है, लेकिन यह किस खाते में जा रहा, इसकी कोई जानकारी अपडेट नहीं की गई है। आयकर विभाग ने यह स्पष्ट किया है कि यदि यह पैसे जमा नहीं किए गए हैं तो उनके विभागों में सर्विस के हिसाब से भुगतान के प्रावधानों का पालन करते हुए इसे जमा करवाना जरूरी है।और यदि उनके सिस्टम से इस पैसों के भुगतान में कोई दिक्कत हुई तो उसे भी दूर किया जाए। सारे डिपार्टमेंट के अधिकारी फिलहाल अपने चार्टड अकाउंटेंट से इस विषय पर बात कर आगे बढ़ने की बात कह रहे। फिलहाल किसी विभाग ने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के नोटिस का जवाब नहीं दिया है।
इन तीनों डिपार्टमेंट को क्यों लग रहा टीडीएस
टीडीएस किसी व्यक्ति की आय के स्रोत पर जो टैक्स कलेक्ट किया जाता है उसे ही टीडीएस कहा जाता है। टीडीएस अलग-अलग तरह के आय स्रोतों पर काटा जाता है जैसे- सैलरी, किसी निवेश पर मिले ब्याज या कमीशन आदि। सरकार टीडीएस के जरिए टैक्स जुटाती है। हालांकि ये हर आय और लेनदेन पर लागू नहीं होता है। चूंकि शिक्षा, वन विभाग और बिजली विभागों में सर्विस लेने का काम चलता है, भुगतान हो रहा है, इसलिए आयकर विभाग इसकी हर साल कटौती करते आ रहा है।
उप पंजीयक से पूछा, कम में क्यों बिकी जमीन?
आयकर डिपार्टमेंट ने विद्यानगर में जमीन की रजिस्ट्री में फर्जीवाड़ा होने की आशंका के कारण उप पंजीयक को नोटिस भेजा है। उनसे पूछा गया है कि जमीन मालिक रघुवर दयाल सिंघल ने जूना बिलासपुर हल्का नंबर की एक जमीन वर्ष 2017-18 में एक करोड़ रुपए में बेच दी। जिसे देखने पर ही जाहिर होता है कि यह बाजार मूल्य से काफी कम में बेची गई है। यहां बिलासपुर स्थित मुख्य मार्ग की जमीन का मूल्य 20 मीटर तक 80 हजार प्रति वर्ग मीटर से रजिस्ट्री होनी है, लेकिन यह काम काफी कम में बिकी है। इसलिए ही उनसे इसकी जानकारी के संदर्भ में पूछपरख जारी है। इसके अलावा जमीन के मालिक को भी इसका नोटिस भेजा गया है। फिलहाल जमीन मालिक की तरफ से इसका जवाब नहीं भेजा गया है।
जानिए…कहां , कितने का बकाया दिख रहा
इनकम टैक्स अधिकारी गणेश्वर मिश्रा ने तखतपुर के ब्लॉक एजुकेशन अधिकारी, वन विभाग के अधिकारी और बिजली विभाग के जिम्मेदारों को जानकारी भेजी है। इसके हिसाब से बिजली विभाग का 11 लाख रुपए टीडीएस जमा नहीं हुआ है। वन विभाग का 26 लाख रुपए बकाया है और शिक्षा विभाग का 40 लाख रुपए बकाया दिख रहा। यह राशि साल 2010 से 2022-23 के बीच की है।

Author: liveindia24x7



