जिस छोटे भाई का हाथ पकड़कर साथ में घूमाया था। जिसको बेटे के जैसे पाला था। उस छोटे भाई की मौत के बाद उसकी दो बड़ी बहनों ने नम आंखों से अंतिम संस्कार किया। बहनों के पास इतने रुपए नही थे कि वह अपने छोटे भाई का अंतिम संस्कार कर सके, ऐसे में गरीब नवाज कमेटी ने दोनों बहनों से रानीताल मुक्तिधाम में हिन्दू रीति रिवाज से दाह संस्कार करवाया। मृतक का नाम लक्ष्मण रजक था जो कि अविवाहित था और रिक्शा चलाया करता था। अचानक से ही कुछ माह पहले उसकी तबियत बिगड़ी और गुरुवार की दोपहर जिला अस्पताल में उसकी मौत हो गई।छोटे भाई की मौत की जानकारी जब बड़ी बहनों को लगी तो रोते-रोते अस्पताल पहुंची। अब जबकि भाई का अंतिम संस्कार करना था तो दोनों बहनों के आगे गरीबी आ गई। बहनों के पास इतने रुपए नही थे कि वह अपने भाई का संस्कार करवा सके। दोनों बहनों ने रिश्तेदारों से भी मदद मांगी पर कोई आगे नही आया। लाचार बहनें सोच रहीं थी कि कैसे भाई का संस्कार होगा। तब जिला अस्पताल में पदस्थ नर्सों ने गरीब नवाज कमेटी के सदस्यों से दोनों बहनों की परेशानी बताई।थोड़ी देर बाद गरीब नवाज कमेटी के सदस्य इनायत अली जिला अस्पताल पहुंचे और मृतक लक्ष्मण रजक के शव को रानीताल मुक्तिधाम पहुंचे और दोनों बहनों के हाथों अंतिम संस्कार करवाया। इनायत अली ने बताया कि मृतक लक्ष्मण लाल मिट्टी के पास रहता था। दोनों बहनें भी गरीब है यहां- वहां काम करने के बाद ही दो वक्त की रोटी जुटा पाती है। इसलिए गरीब नवाज कमेटी ने अंतिम संस्कार करवाया है।

Author: liveindia24x7



