ग्रामीण खपत सुस्त पड़ रही है। दिसंबर तिमाही में दोपहिया की बिक्री 27 महीनों में सबसे कम बढ़ना इसका संकेत है। अप्रैल-दिसंबर 2022 के दौरान खेती-किसानी की लागत 24% बढ़ने के मुकाबले उपज के दाम सिर्फ 9% बढ़ना इसकी सबसे बड़ी वजह रही।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस बीच खेती-किसानी से आय सिर्फ 1% बढ़ी और गैर-कृषि मजदूरी में लगातार कमी आई। इकोस्कोप नाम की रिपोर्ट के मुताबिक, तीसरी तिमाही में ग्रामीण खपत 4.6% बढ़ी। पहली तिमाही में ये बढ़ोतरी 5.5% और दूसरी तिमाही में 6.5% थी। महंगाई के चलते कम चीजों पर ज्यादा खर्च हुआ।
ग्रामीण खपत में सुस्ती के चार बड़े कारण
- वास्तविक कृषि आय में चार-तिमाहियों की सबसे कम बढ़ोतरी
- दिसंबर तक लगातार 8 तिमाही फार्म ट्रेड से आय में कमी आना
- 10 तिमाहियों में पहली बार वास्तविक कृषि निर्यात में गिरावट
- वास्तविक कृषि ऋण घटकर 3 तिमाहियों के निचले स्तर पर आना
9 महीने घटने के बाद 1% बढ़ी कृषि मजदूरी
अक्टूर-दिसंबर तिमाही में देश में वास्तविक कृषि मजदूरी लगभग 1% ही बढ़ी। राहत की बात ये है कि इससे पहले लगातार तीन तिमाही कृषि मजदूरी में गिरावट आई थी।
सरकार ने बढ़ाया ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर खर्च
अप्रैल-दिसंबर 2022 के बीच सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र पर सरकारी खर्च में 13.4% हुई। लेकिन अप्रैल-दिसंबर 2021 के बीच ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सरकारी खर्च में 9.9% गिरावट आई थी।
अप्रैल-दिसंबर में खेती से आय की तुलना में लागत तीन गुना
किसान खेती के लिए जरूरी सामान पर आय से ज्यादा खर्च कर रहा है। अप्रैल 2022 से जनवरी 2023 के बीच डीजल, खाद, कीटनाशक, ट्रैक्टर जैसी मशीनरी और बिजली जैसे इनपुट पर खर्च 24% बढ़ा। इसके मुकाबले कृषि उपज के दाम सर्फ 9% बढ़े। चालू वित्त वर्ष के पहले 9 महीनों में ग्रामीणों का खर्च 5.3% बढ़ा। बीते वित्त वर्ष के पहले 9 महीनों में ये खर्च सिर्फ 0.6% बढ़ा था।

Author: liveindia24x7



