छोटी-छोटी बातों को लेकर अलग-अलग रह रहे 28 जोड़ों ने अपने सारे लड़ाई भूलकर फिर साथ रहने की कसम खाई है। किसी ने बच्चों के भविष्य के लिए, किसी ने बुजुर्ग माता पिता की सेवा के लिए फिर साथ रहने का फैसला किया है। फैमिली कोर्ट में शनिवार को लगी नेशनल लोक अदालत में 157 केसों का सहमति से निराकरण हुआ। भरण-पोषण, बच्चों की कस्टडी, तलाक जैसे केस लंबे समय से कोर्ट में विचाराधीन थे, जिनका सहमति से डिस्पोजल हुआ। फैमिली कोर्ट में पहली बार पांच खंडपीठ में केसों की सुनवाई हुई।
सुबह 10:30 बजे प्रधान न्यायाधीश अनिल कुमार सोहाने, राकेश मोहन प्रधान, भागवत प्रसाद पांडे, माया विश्वलाल व प्रवीणा व्यास ने सुनवाई की। एडवोकेट प्रमोद जोशी, जितेंद्र सिंह ठाकुर, प्रीति मेहना, विजय राठौर और प्रणय शर्मा ने केसों के निराकरण में कोर्ट की मदद की। प्रोटोकोल अधिकारी कुश हार्डिया ने बताया कुल 570 केस सुनवाई के लिए रखे गए थे।
यूं एक हुए जोड़े
केस -1 – मुरैना की संगीता और इंदौर के सुरेश (परिवर्तित नाम) की 2016 में शादी हुई। तीन साल की बेटी है। सास-ससुर के साथ रहने से संगीता परिवाद छोड़कर चली गई थी। 2022 में पति-पत्नी ने सहमति से तलाक का केस लगाया। जज ने परिवार का महत्व समझाया और दोनों विवाद
भूल फिर से साथ घर गए।
केस -2 – इंदौर के ही श्वेता और संजय (परिवर्तित नाम) ने 2009 में शादी की थी। दो बच्चे भी हैं। छोटे-छोटे विवादों के चलते 2015 से पत्नी अलग रह रही थी। 2022 में भरण पोषण का केस लगाया। शनिवार को जज ने बच्चों के भविष्य का हवाला देकर समझाई दी। दोनों मान गए और साथ रहने का फैसला किया।
हाई कोर्ट – 314 केस में 2.24 करोड़ की अवॉर्ड राशि पारित
हाई कोर्ट में नेशनल लोक अदालत के तहत अलग-अलग श्रेणी के 314 केसों का निराकरण किया गया। इसमें 2.24 करोड़ की अवार्ड राशि पक्षकारों को पारित की गई। न्यायाधिपति अरविंद धर्माधिकारी ने लोक अदालत का शुभारंभ किया। कुल 809 प्रकरणों को सुनवाई के लिए रखा गया था।
जिला कोर्ट – दो केस में ही 12 करोड़ की अवॉर्ड राशि
यहां 12 करोड़ से अधिक की अवॉर्ड राशि पारित हुई है। कोर्ट में त्रिवेदी एग्रोटेक प्रा. लि. व राजेश केस जो पांच 5 वर्षों से चल रहा था, इसका सहमति से निराकरण हुआ जिसमें 7 करोड़ 2 लाख की राशि पक्षकार को दी गई। इसी तरह एक अन्य केस में 5 करोड़ 20 लाख रुपए की राशि दी गई।

Author: liveindia24x7



